*भारत रत्न शास्त्री था वो* कर्म पथ पर डटा रहा, सहजता की मूरत वो। छोटी कद काठी का, भारत रत्न शास्त्री था वो।   जवानों सा हौसला लेके, अकेले चला था वो। उदारता का पैगाम लेके, अपनो से लड़ा था वो।   धोती कुर्ता श्वेत पहने, शालीन मानव था वो। कुछ पाई ना जोड़ रखा, ईमान से जीता था वो।   उमंगो का सन् पैसठ, जय जवान का घोष वो। भाषण ओज मुखर से करता, फैलाये एकता वो।   दावानल क्रांति में गूँजता, मरो नही मारो का नारा वो। जय जवान जय किसान का, उत्तम नेतृत्व सहारा वो।   ताशकंद में समझौता का, विचार ले चला वो। पता नहीं किस शांति का, संसार ढूंढ़ चला वो।   आत्मीयता से पूरित, सादगीयुक्त नेता था वो। देख आँखे खुल जाती, किस हाड़ माँस का वो।   राही उनके जैसा ना, अब पथ में कौन खड़ा हो। खो कर भी जिंदा दिल में, विचारों से बड़ा है वो।   छोटी कद काठी का, भारत रत्न शास्त्री था वो।।