कोई रास्ता नहीं की सच निकले

हम फंस चुके है अब दम निकले

मैं देख रहा हूँ यहां का चक्रव्यूह

जिसने भी भेदा वो भी गलत निकले

मैं तो तन्हा अच्छा था अपने साथ

दोस्तो की दोस्ती में सारे गम निकले

किसीको कुछ पता नहीं सच का

जितने भी मिले जवाब सारे भ्रम निकले

मरहम लगाने जो आए थे दर्द पर मेरे,

उनके हाथों में नमक के ही मरहम निकले।

जो भी थे सच की तलाश में वो भी

अपने ही आप से बहोत बरहम निकले

कई लोग है तलाश में अभी भी

वो ढूंढ ही रहे थे कि वंहा से हम निकले