मसला हल होने को है
वो मुझसे दूर होने को है
हमारे बीच का वो शोर
अब खामोश होने को है
मैं देखता हूँ दूर से उसे
अब वो खुश होने को है
अब वो खिला हुआ फूल
कंही खुशबु फैलाने को है
मैं सोचता हूं हम मिलेंगे
पर वो बिखर जाने को है
मेरे बाल बिगड़े देख
वो अपने बाल संवरने को है
ख्वाब में भी देखू तो
वो तस्वीर धुंधली होने को है
कंही चिराग जलने से बचा रहा
कंही चिराग जलने को है
था परिंदा जो था एक साथ
अब वो पेड़ तन्हा होने को है
बाते मेरी सुनी अनसुनी की गई
अब वो अपनी बात रखने को है
