मैं देख सकता था
इसलिए–
नहीं देख पाया प्रेम..
मैं सुन सकता था
इसलिए–
नहीं सुन पाया प्रेम..
मैं चल सकता था
इसलिए–
प्रेम तक नहीं पहुँच पाया..
मैं सोच सकता था
इसलिए–
नहीं समझ सका प्रेम..
मैं सब कुछ कर सकता था,
इसीलिए–
नहीं कर पाया प्रेम...
काश!
मैं अंधा होता,
तो देख पाता प्रेम..
काश!
मैं बहरा होता,
तो सुन पाता प्रेम..
काश!
मैं लंगड़ा होता,
तो पहुँच पाता,
प्रेम तक..
प्रेम,
होशियारों के बस का नहीं,
काश!
मैं पागल होता...
