किस बात को लेकर बड़ा चुप सी हो
बात जो दिल में है कहती क्यों नहीं
देखो, दिखावे के लिए दूर हुए जाते हो
पास मेरे कुछ देर ही, ठहरती क्यों नहीं
वक़्त-बेवक़्त की वो बातें याद हैं ना
मेरे लफ्ज़ों में तुम अब सजती क्यों नहीं
वो किस्से अब भी अधूरे ही हैं, बोलो,
बनके कहानी, मुझमें उतरती क्यों नहीं
~ज्ञान


