देख शीशे में वो खुद को शर्मा रही है,
लेके मन में नई खुशी वो सज रही है,
लगा होटों से थोड़ी लाली कही,
बालों को संभाल, वो सज रही है,
लगाए कभी वो बिंदी माथे पे रंग देख,
कान में पहन झुमके, वो सज रही है
बदल-बदल डाल दुप्पटा वो आँचल पे,
याद कर किसी की पसंद वो सज रही है,
लगी है हाथों में मेहँदी छुपे नाम की,
देख हाथों की मेहँदी वो सज रही है,
अब मन न माने शीशे में देख के,
याद कर आँखें किसी की वो सज रही है।


