मरना
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वो मर गई
वो जिंदा है।
इन पंक्तयों के बीच
अपुन शर्मिंदा है।
क्योंकि मृत्यु का विषय
बेहद संजीदा है।
उसे जागरूक करना था
तो सौ तरीके थे।
एक तो उसका अपना ही था
बस वस्त्र तन से अलग करना था।
मरकर उसने दुख दिया
जिंदा होकर राहत दी
पर विश्वास खो दिया।
