खुशी
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अरे खुशी ! कहां मर गई?
मैं तो यहीं हूं महोदय।
यहीं ! यहीं कहां?
महोदय, बच्चों की अठखेली में
श्रीमती जी की ठिठोली में।
आपकी मीठी बोली में
बुजुर्ग आंखों की मुस्काती कटोरी में।
मदद को बढ़े हाथ में
भोजन पर सबके साथ में।
उफ्फ ! मैं तुम्हें ढूंढ रहा था
पड़ोसी की आलीशान कोठी में
सहकर्मी की नई कार में
दोस्त के सैर वाले स्टेटस में
सोशल मीडिया का लाइक्स, फॉलोअर में।
खैर, अब तुम मिल गई हो
चलो, तुम्हारे मिलने की खुशी मनाते हैं।
- लव कुमार सिंह

