हादसे

......


सड़कों का जाल बिछाके

आदमी इतरा रहे हैं।

चार पहियों पे लोहा सजाके

बेहोश भागे जा रहे हैं।


हवा से बातों की कोशिश में

गले मौत को लगा रहे हैं।

कत्ल सुर्खियों में अब कम हैं,

दहशत हादसे फैला रहे हैं।


देख कटे धड़ भेजे बाहर

आंसू मेरे निकल रहे हैं।

हौले चल लो, धीरज रख लो

विनय आपसे फरमा रहे हैं।


सड़कों का जाल बिछाके

आदमी इतरा रहे हैं।

चार पहियों पे लोहा सजाके

बेहोश भागे जा रहे हैं।


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