उसकी आंखो को जब पहली बार देखा था

इक बार नहीं, सौ बार नहीं, हर बार यही बस सोंचा था

डूब जाऊंगा उसकी इन्हीं आंखो में 

इक ख़्वाब साथ जीने और साथ मर जाने का था


उसकी इक झलक के लिए 

उस झपकती पलक के लिए

उसकी हर खुशी के लिए

उन होठों पे हंसी के लिए

मन हद से गुज़र जाने का था

इक ख़्वाब ..........


उसकी हर बात के लिए

वो छोटी सी मुलाक़ात के लिए

जिसकी हर अदा के लिए

ये ज़िन्दगी सदा के लिए

नाम कर जाने का था

इक ख़्वाब.........


हर रोज़ देखता था जिसे

हर वक्त सोचता था जिसे

हर बार पाता था जिसे

अपने ख्वाबों में, उसे

मन सब बात बता जाने का था

इक ख़्वाब.........


पर उफ़ ये प्यार

इस प्यार का इज़हार

फिर उसकी हां का इंतज़ार

ये सब कौन करे यार

इसलिए इस ख़्वाब का बस ख़्वाब रह जाने था

इक ख़्वाब......