बेवफ़ा



दो जिस्म साथ साथ

दो रूह जुदा जुदा 

एक दूसरे  से राबता 

पर दोनो ही बेवफ़ा


ना जताने का वक़्त

ना मनाने की हसरत

हमसफ़र एक राह

पर दोनो हीं बेवफ़ा


दोनो ने हीं  ख़ुद बनाया

बीच का यह फ़ासला

तीसरा कोई नहीं यहाँ

पर दोनो हीं बेवफ़ा


ये कितने ग़ैर हों गए

आपस में बैर हों गए

न थी कोई बड़ी वजह

पर दोनो हीं बेवफ़ा


तनहा तनहा चलते है

सबसे हँस के मिलते है

कहते है सब ठीक यहाँ

पर दोनो हीं बेवफ़ा


कभी हेरान नज़रों से 

एक दूसरे को ताकते

कभी सहमे सहमे से

एक दूसरे को भाँपते


कब आ गयी यह दूरियाँ

दो दिलो के दरमियाँ

ख़ामोश नज़रें पूछती

आयने से हर सुबह


जाने कब किस मोड़ पर

हो गए दोनो बेवफ़ा