दुआ कबूल हुई जिसकी कितना खुशनसीब होगा,

सबके नसीब में खुदा थोड़े ही लिखा होगा,

हर चीज के लिए दुआ मांगते है लोग,

सोचो जरा खुदा कितना मशरूफ होगा।


सब की अर्जियां कहां सुनता होगा,

कुछ से तो खुदा भी नाराज़ रहता होगा,

सबकी दुआए कबूल हों यह मुमकिन नहीं है,

कैसे समझाए इंसान क्या क्या दरख्वास्त करता होगा।


किसी के हक में फैसला कहां आसान होता होगा,

कभी कभी तो खुदा का भी इम्तिहान होता होगा,

सुना है खुदा की रहमत हुई एक कातिल पर भी,

उसे कतल का अफसोस बहुत हुआ होगा।

-Marmat