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मोह कुर्सी का


मनुष्य रहते मोह का त्याग ,कहाँ हो पाता

अंत काल में भी मोह ,मोक्ष का सताता

पर इस परममोक्ष के मोह से भी भारीकलयुग में कुर्सी का मोह

सबको निगलता जातासबको निगलता जाता

— लक्ष्मी
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