हर बार तुम्हारे चेहरे पर मैं कहीं न कहीं दिख जाती थी । कभी तुम्हारी हंसी, कभी उदासी तो कभी तुम्हारी आँखों में, पूरा न सही आधा अधूरा ही..इस बार मैं कहीं नहीं थी.. बहुत ढूँढा पर कहीं नहीं मिली ~ लक्ष्मी