परिस्थितियां बताती हैं चोट गहरी लगी है तुमको,

ज़ख़्म गहरे हैं, नासूर होने दो, जीने में मज़ा आएगा,

मैं महरह लगाकर मज़ा बिगाड़ने नहीं चाहता।

~ Shrikant Pandey