फिर छिड़ी बात फिइर वही दुश्वारी है

हम वही तू वही क्या बेकअरारी है


कब कितनी किस से करें कैसी बातें

पल्ले अज़ब पड़ी यह दुनियादारी है


कहते नही यूं ही लिख दिया करते हैं

क्या हम ही में बची सारी समझदारी है


जब से चेहरा पे चेहरा लगा रखा है

सब से दोस्ती है सब से यारी है


मत सोच मैं वही हूं जो लिखता हूं

दिल को दिखानी होती अदाकारी है


अब तो यही सही कि सब जाऊं भूल

जिन्दगी जैसे मेरी कोई बीमारी ‌है


रातों से 'दीपक' की बड़ी यारी है

उजालों से क्या करें पर्दादारी है


– दीपक