ज्यों राधा के श्याम !
ज्यों सिय के राम !!
ऐसे ही तुम ...
मेरे लिए पावन नाम !!
ज्यों हरि की भक्ति !
ज्यों शिव की शक्ति !!
ऐसे ही तुम मेरे लिए..
अनुरक्ति !!
ज्यों सागर में ज्वार !
ज्यों नदिया की धार !!
ऐसे ही तुम मेरे लिए..
सावन की फुहार !!
ज्यों बंसी की तान !
ज्यों वीणा के तार!!
ऐसे ही तुम मेरे लिए..
गीत मेघ मल्हार !!
ज्यों गोपियों की प्रीत !
ज्यों मन का संगीत !!
ऐसे ही तुम संग प्रेम!
का गाती रहूँ गीत !!
©®कुसुम लखेड़ा
