सारी दुनिया हमशक्ल है, सारे शहर हमशक्ल हैं, सब कितने मिलते-जुलते हैं शहर जो ताने देता  वो ताने हमशक्ल हैं, सारे मशहूर हमशक्ल सारे अनजाने हमशक्ल हैं, शहर जिस नज़र से है देखता वो नज़रें हमशक्ल हैं, शहर की नजरों में जो पलते हैं नज़ारे गौर से देखो, वो नज़ारे हमशक्ल हैं धमनियों जो बहता है  वो रक्त हमशक्ल है, सारे कायर हमशक्ल सारे शक्त हमशक्ल हैं, बरसों से नहीं बदला मेरा वक़्त हमशक्ल है बस्तियों में सभी के दुख-दर्द हमशक्ल हैं, इमारतों की गर्मी में इक ओर पड़ती सर्द हमशक्ल है, सभी शहरों के मोहल्ले, गलियाँ, दुकाँ, मकाँ, मंडियाँ हमशक्ल हैं धूल-ओ-गर्त हमशक्ल है, परत-परत हमशक्ल है मंदिरों में बजती घण्टियाँ, गूँजते श्लोक और मस्ज़िदों से आती आवाज़-ए-अज़ान हमशक्ल हैं नदियों का कलकल नाद हमशक्ल है, पर्वत चोटियों का पलपल साथ हमशक्ल है, समन्दरों का खारापन हमशक्ल है, गुहाओं का अकेलापन हमशक्ल है इश्क़ में झूमते मजनू हमशक्ल हैं, तड़पती लैलाएँ हमशक्ल हैं स्कूलों को जाते बच्चे हमशक्ल हैं, ना जा पाते बच्चे हमशक्ल हैं सचमुच, सारी दुनिया हमशक्ल है, सारे शहर हमशक्ल हैं, और, जो हमशक्ल नहीं हैं इस हमशक्ल दुनिया की कवायद है ― उन्हें भी हमशक्ल कर देने की....