कभी-कभार सोचता हूँ
अपना तख़ल्लुस ' खोल दो ' रख लूं,
मेरी काली कमीज़ की ऊपरी बटन टूट गई है,
मैं नहीं लिख पाता कमाऊ कविता,
नहीं भरवा पाता गाड़ी में पेट्रोल
ये सारी बेमेल बातें मिलेंगी किसी रोज़
किसी हॉरिज़न पर...
जैसे मिले थे दो बेमेल लोग
काॅलोनी के पीछे वाले पार्क में