मेरे साथ एक लड़की पढ़ती है चुप-चुप रहती है, गुप-चुप रहती है किसी से कुछ नहीं कहती मगर, अकसर मुँह दबाये मेरे लतीफ़ों पर हँसती है ।   उसे नहीं ख़बर, ये लतीफ़े कहाँ से आए हैं ? वो नहीं जानती, ये खूंखार चुटकुले मेरे आँसुओं के ज़ाए हैं ।   हमारी कभी बात नहीं हुई ना उसने पहल की, ना ही मैंने ज़रूरत समझी ; ना उसने नज़र मिलाई, ना मैंने कभी उसे आँख भर देखा मगर, अकसर मुँह दबाये, चेहरा छुपाए मेरे लतीफ़ों पर हँसती है ।