मेरे साथ एक लड़की पढ़ती है
चुप-चुप रहती है,
गुप-चुप रहती है
किसी से कुछ नहीं कहती
मगर, अकसर मुँह दबाये
मेरे लतीफ़ों पर हँसती है ।
उसे नहीं ख़बर, ये लतीफ़े
कहाँ से आए हैं ?
वो नहीं जानती, ये खूंखार चुटकुले
मेरे आँसुओं के ज़ाए हैं ।
हमारी कभी बात नहीं हुई
ना उसने पहल की,
ना ही मैंने ज़रूरत समझी ;
ना उसने नज़र मिलाई,
ना मैंने कभी उसे आँख भर देखा
मगर, अकसर मुँह दबाये,
चेहरा छुपाए
मेरे लतीफ़ों पर हँसती है ।