मैं तभी रुक पाऊंगा

जब रुकने की कीमत चुका पाऊंगा

हवाई जहाज, रेलगाड़ी, वाहन सब बंद पड़े हैं

मैं पैदल पैदल घर जाऊंगा

मैं पैदल पैदल घर जाऊंगा


लाठी से पिट जाऊंगा,

पटरी पर कट जाऊंगा

नीति और बुद्धि के इस नाश को

कहा मैं समझ पाऊंगा

मैं पैदल पैदल घर जाऊंगा

मैं पैदल पैदल घर जाऊंगा


गेहूं मैं उगाऊंगा

इमारत मैं बनाऊंगा

सड़क से छान-बटोर, कुत्तों संग सारा दूध भी पी जाऊंगा

ईटा रोड़ी मलवा पत्थर संग ज़िल्लत सर पर उठाऊंगा

मैं पैदल पैदल घर जाऊंगा

मैं पैदल पैदल घर जाऊंगा


तुम सबको याद दिलााऊंगा

तुम्हारी बेतरतीबी, तुम्हारी मक्कारी, तुम्हारी बेमानी

मुझसे मेरा दर्द नहीं, मुझको दर्द बाटा हैं

अपमान के, पीड़ा के सब विष मैं पी जाऊंगा

मैं पैदल पैदल घर जाऊंगा

मैं पैदल पैदल घर जाऊंगा

लौट के कभी ना आऊंगा

मैं पैदल पैदल घर जाऊंगा

मैं पैदल पैदल घर जाऊंगा


~ कुशाग्र