स्वप्न


एक स्वप्न,

कि तुम नदी में बह रहे

धँस रहे हो तुम ज़मीन में।


ये स्वप्न हो सकता है

थोड़ा भयानक और डरावना।


किन्तु,

तुम्हारा स्वप्न  

हक़ीक़त है 

नदी के लिये 

जिसके साथ-साथ तुम बह रहे

पहाड़ों का प्रेमपत्र लेकर।


वास्तव में,

तुम्हारे स्वप्न में

है झलकियाँ 

काल पुरुष का 

जिसके जमीन में धँसने से

धरती बाँझ होने से बच गई।


और,

तुम्हारे स्वप्न में

चुहलबाजी है

एक लड़की की

जिसके संग तुम्हें बिताना है

पूरी ज़िंदगी 

स्वप्न्न से निकलकर।


 ― कुन्दन चौधरी


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