
तुम देखना मुझे गुज़रते हुए ट्रेन कि खिड़कियों से
मैं खाली पड़ी ट्रेन कि एक उदास बोगी कि तरह
कहीं स्टेशन पर बैठा मिलूँगा।
तुम देखना जैसे पत्थर दबा होता हैं पटरियों के नीचे
वैसे ही मेरे सीने में दबा हुआ है तुम्हारी कई यादें।
तुम देखना तुम्हारा हाथ थामे
Read More! Earn More! Learn More!
