| मुड़ना |


वो मुड़ा,

क्योंकि कच्चे रास्ते 

गाँव से 

शहर की तरफ़ मुड़ता था।


वो मुड़ा,

क्योंकि उसके नीचे

की ज़मीन

बर्फ़ सी पिघल रही थी।


वो मुड़ा,

क्योंकि एक उलझा हुआ

रिश्ता उसे

सुलझाना था।


वो मुड़ा,

क्योंकि उसे पुकारने

में छिपी थी

एक दर्द भरी आवाज़।


उसके लिए

मुड़ना 

लौटना नहीं था,

लौटने की उम्मीद को

ज़िंदा रखना था।


― कुन्दन चौधरी


Pic : Kundan Choudhary