"मैं अब भी तुम्हें सताता हूँ"
मैं अब भी तुम्हें सताता हूँ, हिचकियां बन के नहीं,
जो तुम स्कूटी पे निकलते हो,तो मैं ब्रेकर बन के तुम्हें उचकाता हूँ.........
मैं अब भी तुम्हें सताता हूँ, आसमां के सितारा बन के नहीं,
जो तुम मच्छरदानी में सोती हो,तो मैं मच्छर बनकर कानों में तुम्हारे फुसफुसाता हूँ...
मैं अब भी तुम्हें सताता हूँ, रात में मैसेज कर के नहीं,
जो तुम सोशल साइट्स चलाते हो,तो उसपे मैं सगेशन फ्रेंड बन के तुम्हें चिढ़ाता हूँ..
मैं अब भी तुम्हें सताता हूँ, पानीपूरी के ठेले पे मुँह फुला के नहीं,
जो तुम जाती हो नुक्कड़ से,तो चाय के टपरी पे खड़ा मुस्कुराता हूँ......
मैं अब भी तुम्हें सताता हूँ,तुम्हें गले लगा के नहीं,
जो तुम नींद में होती हो,तो मैं कसकर तकिये सा तुमसे लिपट जाता हूँ...
मैं आज भी तुम्हें सताता हूँ,तुम्हारे होंठो पे लिपिस्टिक बन के नहीं,
जो तुम संवरती हो आइनों के सामने,तो मैं काजल बन के आंखों में तुम्हारे लग जाता हूँ...
मैं अब भी तुम्हें सताता हुँ, तुम्हें याद कर के नहीं,
जो तुम बात करते-करते मेरा नाम लेती हो, तो मैं जुबां सा लड़खड़ा जाता हूँ...
हाँ मैं ऐसे ही तुम्हें सताता हूँ!


