गुम गई किताबों में

क्रांति की विचारें।


अब कानों में पड़ते 

फूहड़ता के नारे।


किसानों की पूँजी

चट कर गए सारे।


नेता के तिजोरी

की चमक रही सितारे।


गिरते रहे लोग

उठती रही सरकारें।


हाय! रे जनता

क़िस्मत के मारे।


आज़ादी का असली सपना

सपना है प्यारे।