अकेला हूँ,
साथ साया भी नहीं जाऊं तो कहाँ जाऊं मैं,
अबसार बन जाऊं,
या नदियों सा ठहर जाऊं मैं।
ग़ुलाबी ओंठ दिखे,
फिर मयखाने में आज लरखड़ा जाऊं या संभल जाऊं मैं,
घूँघट में चाँद है,
या बला है कोई,
देख लूँ या शरमा जाऊं मैं,
अकेला हूँ,
साथ साया भी नहीं जाऊं तो कहाँ जाऊं मैं,
उफ़्फ़,
क़यामत हो तुम खुदा की ,
ख़ता करूँ,
या घबरा जाऊं मैं,
अकेला हूँ,
साथ साया भी नहीं जाऊं तो कहाँ जाऊं मैं,
हुस्न का बूत बनकर,
जला दोगी या मोम सा पिघल जाऊं मैं जवानी की फुहारों से ,
डूबा दोगी या साग़र में समा जाऊं मैं,
अकेला हूँ,
साथ साया भी नहीं जाऊं तो कहाँ जाऊं मैं,
बेइंतहा इश्क हैं बस तुझसे,
बयां कर दूं या दिल चीर कर दिखा दूँ मैं,
कोई दूजा भी है तुझ सा,
जहाँ में,
इज़हार कर दूँ उन्हें ,
बेवफ़ा बन जाऊं मैं।
अकेला हूँ,
साथ मेरे साया भी नहीं जाऊं तो कहाँ जाऊं मैं !