इतनी जोर से क्यों पुकार रहे, मैं करीब हूँ तुम्हारे
तुम्हें यकीन होगा, तुम अपनी आँखे बंद करो और मुस्कुराओ
तुम्हारी मुस्कुराहट भी सुन लेता मैं।
इतनी हैरां क्यों है, वो अफवाहें थी जो खुद मे सीमट कर रह गई
आहिस्ता साँस लो
तुम्हारी खुशबू से भी सुन.लेता मैं।
पायल की झनकार तेज है, जमीं पर पांव जरा धीरे रखो
इन झनकार को आहट ही रहने दो
तुम्हारी आहट से भी सुन लेता मैं।
और.भी लोग है यहाँ, उन्हें खलल पड़ता है
जरा धीरे बोलो
तुम्हारी धड़कने से भी सुन लेता मैं।
सामने वाले कुर्सी पर बैठ जाओ, आज यूं ही देखना चाहता
कुछ देर यूं ही चुप रहो
तुम्हारी खामोशी को भी सुन लेता मैं।
अपनी चुप्पी तोड़ दो, कोई गजल गुनगुना दो
मेरे लिखे ही सही, इशारे में गा दो
तुम्हारे इशारे भी सुन लेता मैं।