ये नए दौर की बातें हैं सभी,
आओ तुम्हें बतलाते हैं अभी ।
ज़िंदगी में अजब सी दौड़ है इस ज़माने में,
हर कोई पगलाया सा है दौलत कमाने में।
भीड़ सी लगी है चौराहों पे,
वक़्त बर्बाद नहीं कर्ता कोई वक़्त तक बतलाने में,
इस दौर में सहूलियत बहुत है लोगों पर,
मगर फिर भी न जाने पागल हैं सुकून जुटाने में।
ये नए दौर की बातें हैं सभी,
आओ तुम्हें और बतलाते हैं अभी ।
जोड़ने की आदत क्यूँ होगी भला,
पैसा तो मैल है न हाथों की।
जिम्मेदारी कभी उठाई ही नहीं,
माँ बाप ने पूरी जो कर दी जरूरत हर बातों की।
आदतें बुरी कहूं, या कसूर ज़माने का है,
ये किस्सा अंजान नहीं, अब हर एक घराने का है।
अपनों के लिए अपने ही पास अब वक़्त नहीं है,
टीचर तो क्या, माँ बाप की इज्जत का कानून भी अब सख्त नहीं है।
सवारि अपने समान की ख़ुद ज़िम्मेदार हैं,
दूसरी तरफ ना देखिए जनाब, हम सब इसके भागीदार हैं।
कुछ जिंदगी में जीतने की दौड़ है,
ऐसा बतलाते हैं सभी।
दौड़ है किस्से लेकिन,
इस सवाल कतराते हैं सभी।
सभी दौड़ रहे हैं,
रुकने का वक़्त नहीं,
डर है न,
पीछे ना छूट जाएं कहीं।
जो है अब उसमें खुश रहना गवारा नहीं,
बेचैन हैं, जो उसपे है,
अखिर वो क्यूँ हमारा नहीं।
अरे रुक जाओ ज़रा, क्यूँ बेचैन हो?
बहुत कुछ है, क्या हुआ जो सारा नहीं।
मां बाप संग बैठ लो एक बार,
भूल जाते हैं हम, के उनके बिना भी गुज़ारा नहीं
एक इस Mobile ने बर्बाद करदीया है सब,
वर्ना इंसान इतना नाकारा न था।
जीवन में सुकून था,
चैन का इतना मारा ना था।
अब इसके बिना न सुबह ना शाम है,
इसी से शुरू इसी पे जिंदगी तमाम है।
सम्भल जाओ अभी देर नहीं हुई,
निकाल दो वो शिकवे गिले, फिर न सुनेगा कोई,
रुक जाते हैं, जो हम भाग रहें है सभी,
वर्ना वक़्त का क्या है,
जो बीत गया, वो लौट न आएगा कभी।
ये कुछ नए दौर की बातें हैं सभी,
अब क्या क्या तुम्हें और बतलायें अभी ।
