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यकीन


खुट-ए-माज़ी पर तदबीरें नाकाम सारीजितनी बाहर खींची उतनी गढ़ गयी

और उसपर ये मेरा ऐतबार किकाठ की हांडी भी दो बार चढ़ गयी

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