जहां सूरज की पहली किरण दिखती थी,। जहां चांद की चमक सदियों से बरसती थी। जहां हर मौसम बारिश बरसा करती थी। वहां, जहां तेरी एक झलक दिखा करती थी। जहां पतझड़ के बिना ही पत्ते गिरा करते थे। जहां बेवजह ही पक्षी चहचहाते थे। जहां फूलों की खुशबू में, तेरी खुशबू हुआ करती थी। जहां, फूलों के रंग में तेरी सूरत हुआ करती थी। वहां, जहां तेरी एक झलक दिखा करती थी। जिन रातों में तेरे सपने आया करते थे। जिन सांसों में तेरी सांसे हुआ करती थी। जिन दिनों की शुरुआत तेरे नाम से हुआ करती थी। जिस दिल में तेरी धड़कन सुनाई देती थी। जहां नफ़रत की दुनियां में, मोहब्बत का आशियां हुआ करता था। वहां, जहां तेरी एक झलक दिखा करती थी। तकदीर मेरी होती थी, लेकिन किस्मत तूं हुआ करती थी । कुछ बातें तो दिल में दफ़न है। जुबां पर होकर भी, लब्जौ में बयां न हो सके। मैं तो आज भी वही हूं , जहां हम बिछड़े थे, और आज भी मैं तेरा इंतज़ार करू। वहां, जहां तेरी एक झलक दिखा करती थी......।