सारी मुस्कानें गायब हैं, सपनों का साथ भी छूटा है ह्रदय पीर से पागल है, मन का विश्वास भी टूटा है I   जब से तुमसे दूर हुआ, अपना कुछ ऐसा आलम है तुमको हर क्षण गाता हूँ, फिर भी लगता है कुछ छूटा है I   एक तुम्ही थे जिसको मैंने, अन्तर्मन से प्यार किया और सभी ने मोहब्बत के, परदे में मुझको लूटा है I   एक तेरी मुस्कान है सच्ची, सकल चराचर में निश्क्षण दौलत-शोहरत का ताना-बाना, मुझको लगता झूठा है I