नये तेवर अपनाये जा रहे हैं, गुनाहगार बचाये जा रहे हैं बाहर बाहर ढोल बजा है इंक़लाब का, अन्दर से मासूम जलाये जा रहे हैं बातों में तो धरती स्वर्ग बन चुकी है लेकिन, कामो में ये नरक मचाये जा रहे हैं