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शे'र


गिर्या गिर्या के ज़िन्दगी बसर कर रहे हैं आजकलकुछ हबीब हैं जो रक़ीबों का असर कर रहे हैं आजकलमैं तो चाहता हूँ दिन-रात मिश्री घुली रहे मुल्क मेंजाने क्यों कुछ लोग ज़हर से सहर कर रहे हैं आजकल

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