नाकामी के अँधेरे अब तो मुझे डराने से भी डरते हैं मैं वो चिराग़ हूँ कि आँधियों ने रोशन किया है जिसे
नाकामी के अँधेरे अब तो मुझे डराने से भी डरते हैं
मैं वो चिराग़ हूँ कि आँधियों ने रोशन किया है जिसे