निकला हूँ जब सफ़र पे, चलना मुझे पड़ेगा मंजिल के रास्तों पे, ढलना मुझे पड़ेगा मेरे दिल में हौसला है, मैं तुझसे कह रहा हूँ ऐ वक़्त मेरे खातिर बदलना तुझे पड़ेगा   मैंने जो कर दिया है, तुम भी वो कर के देखो मोहब्बत की इस ज़मीं पर तुम भी उतर के देखो तन मन तुम्हारा पावन हो जायेगा क्षण में दीवानगी की हद तक तुम भी गुजर के देखो   गर मेरा प्रस्ताव तुमने ठुकराया न होता तो तय है कि ज़माने ने मुझे अपनाया न होता भला कौन देता मिशाल राधा-श्याम की दुनिया में गर ख़ुदा ने मोहब्बत को बनाया न होता