जिसकी आँखों में डूबा था तब, आज तलक बेहोश हूँ दीवानेपन में जिसके, मैं आज तलक मदहोश हूँ चलती है तो यूं लगता है, जैसे आसमान से परी चली हो परवरिश लगती है ऐसी, जैसे फूलों में पली बढ़ी है अब भी मेरे दिल में, वो हर वक़्त घर करती है कोई मासूम सी लडकी, मेरे साथ सफ़र करती है बातें उसकी ऐसी लगती हैं, जैसे मानस की चौपाई उसके आगे फीकी लागे, हर बड़े कवि की कविताई आँखों से छूकर मुझको, जाने मुझमे क्या क्र डाला अब भी ऐसे लगता जैसे, मैंने पी ली हो पूरी मधुशाला साँसों की हरारत उसकी, मुझको तर-बतर करती है कोई मासूम सी लड़की, मेरे साथ सफ़र करती है वो मुझसे अक्सर कहती है, मैं प्यार आपसे करती हूँ लेकिन मम्मी-पापा की, इज्ज़त खोने से डरती हूँ इसलिए निवेदन आपसे है, बस अच्छे अधिकारी बन जाओ फिर पापा से करके विनती, मुझको अपने संग ले जाओ उसकी ये सारी बातें, मुझमे और असर भरती हैं कोई मासूम सी लड़की, मेरे साथ सफ़र करती है