किताबों के पन्ने पलटता हूँ आजकल, शायद ज़िन्दगी को पलटने की तरक़ीब मिल जाये  यही वक़्त है कि फितरत पढ़ने का हुनर सीखो तुम, जाने कब कौन सा इन्सान बन कर रक़ीब मिल जाये