इसको पावन शिवाला बना दीजिये
खंडहर सी पड़ी है मेरी ज़िन्दगी,
आप आकर महल सा सजा दीजिये
दिल की दहलीज़ ..................
पूर्णिमा का चमकता हुआ चाँद तुम,
मैं ग्रहण में फँसे एक सूरज सा हूँ
राम बनकर मुझे दे दो जीवन प्रिये,
एक बेजान पत्थर की मूरत सा हूँ
गम के अँधियारे घेरे हैं हर ओर से
प्यार का एक दीपक जला दीजिये
दिल की दहलीज़ ..................
रूप यौवन भला कब रहा है प्रिये,
याद रखता ज़माना मोहब्बत सदा
राधा और श्याम का प्रेम उपमान है
दुनिया करती है उनकी इबादत सदा
हार कर अपना दिल प्यार की जंग में
मेरी उजड़ी सी बस्ती बसा दीजिये
दिल की दहलीज़ ..................
दिल की दहलीज़ पर रख के अपने कदम,
इसको पावन शिवाला बना दीजिये
खंडहर सी पड़ी है मेरी ज़िन्दगी,
आप आकर महल सा सजा दीजिये
दिल की दहलीज़ ..................


