किस कदर हमकों एक शख्स पराया सा लगाखुद का चेहरा भी फिर ग़वारा सा लगाआरज़ू थी चाँद को भी तारो कीहमें खुद के घर मे भी अंधेरा सा लगा
किस कदर हमकों एक शख्स पराया सा लगाखुद का चेहरा भी फिर ग़वारा सा लगा
आरज़ू थी चाँद को भी तारो कीहमें खुद के घर मे भी अंधेरा सा लगा