हम महफिल मे ये खुलासा कर बैठे
जो नहीं करनी थी, बो खता दुबारा कर बैठे

बड़ी मुश्किल से गुज़रा था जो दौर अपना
फिर से फूल को सारी खुशबू फ़िदा कर बैठे

इक आसान सी ज़िन्दगी को मुश्किल बना लिया
हमने ख़ुदा को इंसान इंसान को ही ख़ुदा बना लिया

सब भूल कर तेरी महफ़िल में सज़दा कर बैठे
जो नहीं करनी थी, बो खता दुबारा कर बैठे

किसी से उम्मीद भी तो कैसे लगाए ग़ालिब
इसी उम्मीद में दिल को पत्थर कर बैठे