चला जब बचपन मै तो बो ऊँगली थी साथ मै , आज बड़ा क्या हुआ की फिजाओं मैं उड़ने लगा!! लड़खड़ाए कदमो को चलना शिखाया उसने , आज उन कदमो का बो सहारा न बन सखा!! हर एक बात को बड़े लहजे से समझाया उसने , आज बड़ा क्या हुआ कि लहजा भूल गया!! छोटी सी डॉंट पर रो देता था बचपन मैं , आज डॉंटा तो दर्द हो उठा !! कितनी खुशियां परोसी थी उसने थाली मै , आज बो उन सारी खुशियों को खा गया!!