दिल में तमन्ना पाल कर जी रहे हो
तुम किसको अपना मान कर ज़ी रहे हो
यहाँ मौसम भी बदल जाता मिज़ाज अपना
ज़नाब, किस ग़लतफहमी में ज़ी रहे हो

किसी की मुस्कुराहट के लिए ज़ी रहे हो
या खुद के आंसूओ के लिए ज़ी रहे हो
यहाँ,आईना भी बदलता है रोज चेहरे कई
तुम किस चेहरे के लिए ज़ी रहे हो
ज़नाब, किस ग़लतफहमी में ज़ी रहे हो

सौदा कर बैठे हो दिल का
अब जज्बात के लिए जी रहें हो
इंसानी फ़ितरत को प्यार समझ कर
तुम उस झूठ के लिए ज़ी रहे हो
ज़नाब, बड़ी ग़लतफहमी में ज़ी रहे हो