सुन! मेरे हीरा वास्तु-शास्त्र के हिसाब से हमारे घर का चूल्हा ग़लत ज़गह पर है---। उस पुरानी जोहड़ी से भरकर लाई थी मां माटी का एक बठळ काम से घर लौटते वक़्त---। दिनभर तगारी-ईंट ढ़ोते-ढ़ोते ढ़लते दिन बाबा ने मांगी थी ईंटों में से तीन ईंटें---। हमारे घर का चुल्हा रोज जलता है मेरे हीरा!