सुन! मेरे हीरा
वास्तु-शास्त्र के हिसाब से
हमारे घर का चूल्हा
ग़लत ज़गह पर है---।
उस पुरानी जोहड़ी से
भरकर लाई थी मां
माटी का एक बठळ
काम से घर लौटते वक़्त---।
दिनभर
तगारी-ईंट ढ़ोते-ढ़ोते
ढ़लते दिन बाबा ने मांगी थी
ईंटों में से तीन ईंटें---।
हमारे घर का चुल्हा
रोज जलता है
मेरे हीरा!