जो वक्त की कद्र करता है
वक्त उसी का बदलता है
बहाने मत ढूँढ अपनी हार के
डूबना पढ़ता है समन्दर में
तभी मोती निकलता है
~कुमार ऋषि


जो वक्त की कद्र करता है
वक्त उसी का बदलता है
बहाने मत ढूँढ अपनी हार के
डूबना पढ़ता है समन्दर में
तभी मोती निकलता है
~कुमार ऋषि