मेरी पहली तमन्ना भी तुम्हीं
मेरी आख़िरी ख़्वाहिश भी तुम्हीं
तुम्हें चाहने के अलावा कोई काम नहीं
जो तेरा नाम नहीं तो मेरा नाम नहीं
रातें जो गुज़ारीं तुझे याद करके
तो सुबह भी देती है पैग़ाम वही
ख़्यालों में बसी हो तुम तबस्सुम की तरह
जमीं हो या हो आसमां, मुझे कहीं आराम नहीं
मेरी पहली तमन्ना भी तुम्हीं
मेरी आख़िरी ख़्वाहिश भी तुम्हीं
~कुमार ऋषि
