कोरोना महामारी ने ,

हम जन - मानस को यह बताया ।

तुम मनुष्य ने प्रकृति से ,

इस तरह है नाता तोड़ा ।।

तुमने यह भी ना सोचा ,

कि तुम्हारी बुद्धि महान है - 2



तुमने तो यह भी ना सोचा ,

कि इस धरती के तुम ,

अकेले नहीं हकदार हो ।

फिर भी तुमने छोटे - छोटे

जीव - जन्तु पे किया आत्याचर है ।।

तुमने यह भी सोचा ,

कि तुम्हारी बुद्धि महान है।



तुमने कानन है इस तरह काट दिए

कि गर्मी से व्याकुल हो ,

तुमने तो आलीशान महल बनाया

जंगल काट तुमने फैक्ट्रियां लगाई ।

तुमने अपने स्वाद के लिए

छोटे जीव को आहार बनाया ।।

तुमने यह भी ना सोचा ,

कि तुम्हारी बुद्धि महान है।



बहुत दिनों बाद हमने देखा

शुद्ध हवा धरती पे चली ।

जब तुम डर से अंदर थे ,

बेखौफ घूम रहे ये जीव - जन्तु बाहर थे ।।

तुमने यह भी ना सोचा ,

कि तुम्हारी बुद्धि महान है।



हमने तुमको यह बतलाया ,

करों ना जीव - जन्तु पे आत्याचार ,

यही जीव - जन्तु ने सिखाया है तुमको ,

इस दुनिया में रहने का संस्कार ।

तुम अपनी आदतें सुधारों ,

गन्दगी ना फैलाओ ।।


Prince Kumar