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शे'र


मैं न कहती हूँ कि लाओ चाँद तारे तोड़करबस मुझे इस हाल में ऐसे न जाओ छोड़कर

तुम जो हरदम ही मुझे जान-ओ-जहाँ कहते रहेजा रहे हो ज़िंदगी से क्यूँ भला मुँह मोड़कर

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