दोपहर हो गयी कि सूरज सर पे है मेरे
क्या बात है न कॉल न मैसेज किया कोई
चाय पीकर फिर से अब तुम सो गयी हो क्या
या किसी के ख़्वाब में गुम हो गयी हो क्या
कोई और भी रौशन है क्या मेरे दीये के बाद
कोई और भी कुछ कर गया मेरे किये के बाद
क्या मर गया हूँ मैं तेरे दिल-द्वार के अंदर
कोई प्यार का क़तरा नहीं क्या प्यार के अंदर
दिखता नहीं क्या मुझमें अब तुमको कोई फ़ायदा
तेरे आशिक़ों की क्या कतारें हो गयी ज़ियादा
क्या गिन रही हो मुझको भी फ़ेहरिस्त में
लो डाल दिया नंबर तुम्हारा ब्लैकलिस्ट में.....
