प्यार करने का वादा वो हमसे निभाते रहे,
रूठे हम गर तो वो हमें मनाते रहे।

हम तो सदा किस्मत की ठोकरें खाते रहे,
 गम में भी खुद के लुटने का जश्न मनाते रहे।।

 प्यार करने वक्त पर हम सदा झुंझलाते रहे,
हमसे वादा तो किया था सदा प्यार करने का ।

 हमको लूटकर वो खुश भी बहुत हुए, और
 हमारे लुटने का महफ़िल में जश्न भी मनाते रहे।।

 प्यार करने हम सदा उन्हें (दोस्तों को)यही समझाते रहे, सदा करो प्यार केवल एक से।
फिर भी उफनाती नदी में,हम ही सदा गोते खाते रहे।।
 प्यार करो हम सदा उनके (दोस्तों के)लिए दुआ मनाते रहे, खुद की किस्मत के लिए भी गीत गाते रहे। फिर भी गम में भी हम क्या करें "निश्छल", खुद को जहां का तहां हम पाते रहे ।। प्यार करो